ताज़ा समाचार-->:
अब खबरें देश-दुनिया की एक साथ एक जगह पर-->

अपराध जगत

यह उ.प्र. पुलिस की कौन सी बहादुरी है? यह न्यायपालिका के क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं.?

आकाश श्रीवास्तव के साथ

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

10 जुलाई 2020

यह उत्तर प्रदेश की पुलिस की कौन सी बहादुरी है जिसने अपनी वर्दी और साथियों से गद्दारी करके अपने ही साथियों को कानपुर के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके साथियों के हाथों से मौत की घाट उतरवा दिया। और उस अपराधी को उ.प्र पुलिस पहले दिन से अपने राज्य की सीमा में पकड़ पाने और ढ़ंढने में पूरी तरह से नाकाम रही। कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल इसे उ.प्र. पुलिस की बहादुरी और साहसिक कार्य बताते हैं यह शर्म की बात नहीं तो और क्या है? कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल से जब पत्रकारों ने पूछा कि कानपुर पुलिस से लगातार दो दिन से अपराधी पिस्तौल कैसे छीनकर भाग रहे हैं यह कैसे संयोग है? तो आईजी मोहित अग्रवाल चुप हो जाते हैं?  फिलहाल पुलिस ने जिस हिसाब से काम किया है, लगता है पुलिस विभाग ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर लिया है।


दुर्दांत अपराधी विकास दुबे, जिसे पुलिस ने मार गिराया।

जिस विकास दुबे को उ.प्र. पुलिस की 60 टीमें पकड़ने की बात तो छोड़िए सुराग तक नहीं लगा पायी वही उ.प्र. की पुलिस अपनी बहादुरी की पीठ थपथपा रही है। उज्जैन महाकाल के दरबार में तैनात एक निजी दरबारी ने जब विकास को पकड़कर पुलिस के हवाले किया तो पुलिस इसे अपनी बहादुरी समझती है? एक निहत्थे अपराधी को पुलिस के दर्जनों जवान जो आधुनिक हथियारों से लैस होकर दबोचकर रखते हैं, वह पुलिस से कैसे भागने की कोशिस कर सकता है, फिर उसे गोली मार दिया जाता है और  उ.प्र पुलिस इसे अपनी बहादुरी बताती है? यदि पुलिस से विकास दुबे को भागना ही था तो उज्जैन में वह खुलेआम अपने आपको खुद को विकास दुबे कानपुर वाला कहकर खुद को पुलिस के हवाले क्यों करता? जिन पुलिस वालों की सह पाकर विकास दुबे ने कितनों को मारा उनके परिवार वालों को असहनीय क्षति पहुंचाई उन पुलिस वालों पर कोई सख्त कार्रवाई अभी भी उ.प्र. की सरकार और न हीं उ.प्र. पुलसि ने नहीं की और वह अपनी बहादुरी की पीठ खुद थपथपा रही है। फिलहाल उ.प्र. के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के इंकाउंटर पर सवाल भी उठ रहे हैं और राजनीति भी शुरू हो गयी है।  विकास दुबे के अंत पर कोई सवाल नहीं उठा रहा है। सवाल उस सिस्टम पर है जो विकास दुबे को एक दुर्दांत अपराधी बनाता है। सवाल उस पुलिसिया कार्रवाई के तरीके पर है जिसने न्यायपालिका के काम को अपने हाथों में ले लिया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पूरे इंकाउंटर पर कहा है कि कार नहीं पलटी है, सरकार को पलटने से बचाया गया है। इस बीच उ.प्र. की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इंकाउंटर पर सवाल उठाते हुए इस इंकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा है कि अपराधी का अंत तो हो गया लेकिन अपराध को संक्षरण देने वालों का अंत कब होगा।





जरा ठहरें...
 
 
Third Eye World News
इन तस्वीरों को जरूर देखें!
Jara Idhar Bhi
जरा इधर भी

Site Footer
इस पर आपकी क्या राय है?
चीन मुद्दे पर क्या सरकार ने जितने जरूरी कठोर कदम उठाने थे, उठाए कि नहीं?
हां
नहीं
पता नहीं
 
     
ग्रह-नक्षत्र और आपके सितारे
शेयर बाज़ार का ताज़ा ग्राफ
'थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़' अब सोशल मीडिया पर
 फेसबुक                                 पसंद करें
ट्विटर  ट्विटर                                 फॉलो करें
©Third Eye World News. All Rights Reserved.