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देश एवं राजनीति

भविष्य में हमारे जवान शहीद न हों इसके लिए देश को शक्तिशाली बनाना होगा – सत्य बहुमत पार्टी

सत्यदेव चौधरी

राजनीतिक विश्लेषक

नई दिल्ली 17 जुलाई 2020

भारत चीन सीमा विवाद पर हुई झड़पों में पहले तो समाचार आया हमारी सेना के दो जवान और एक वरिष्ठ अधिकारी शहीद हो गए, समय बीतते-बीतते शहीदों की संख्या तीन से बीस हो गयी। आजादी से आज तक सीमाओं पर सैनिकों के शहीद होने की घटना न तो पहली है और न ही अन्तिम। ऐसी दर्दनाक घटनाएं बार-बार होती हैं, और समाधान के लिए हमारे सत्ताधारी व विपक्षी मिलकर बैठकों, वार्ताओं और भाषणों में समय बर्बाद करके फिर से सेना के जवानों को शहीद होने की प्रतीक्षा में छोड़ देते हैं। सामना करने का साहस नहीं है। और अहिंसा, शांति व वार्ता के पाठ पढ़ाते हुए हमारे  सत्ताधारी डरपोक होने का एक और उदाहरण बनकर सत्ताधारी सुख भोगने में व्यस्त हो जाते हैं। संसार में ऐसा कौन सा प्राणी है जो अहिंसा, शांति व वार्ता की स्थिति में न रहना चाहता हो, परन्तु हर प्राणी दूसरे पक्ष की बात न मानकर अहिंसा, शांति व वार्ता करना चाहता है अपनी ही शर्तों पर। अहिंसा, शांति व वार्ता की बात अपने से समानान्तर वालों से ही सम्भव है, इसलिए जिससे आप अहिंसा, शांति व वार्ता की बात करना चाहते हो, सर्वप्रथम उसके समानान्तर बनना आवश्यक है- ये सच्चाई है।
भविष्य में हमारे जवान शहीद न हों इसके लिए देश को शक्तिशाली बनाना अनिवार्य है। बिना शक्तिशाली बने ऐसी घटनाओं को होने से नहीं रोका जा सकता, और शक्तिशाली केवल नारों और भाषणों से बनना सम्भव नहीं है। देश को शक्तिशाली बनाने के लिए तीन स्तम्भों का आधार मजबूत होना आवश्यक है, पहला राजनीति, दूसरा कूटनीति और तीसरा रणनीति। सबसे पहले राजनीति की बात करते हैंः मैं अपने भारत को शक्तिशाली मानता हूं, परन्तु शक्तिशाली होने पर भी हम गठबंधन और ध्रुवीकरण की भ्रष्ट राजनीति से घिरे हुए हैं। झूठे प्रजातंत्र और झूठे बहुमत पर आधारित गठबंधन की राजनीति में बने नेताओं की प्राथमिकता सत्ता होती है न कि सेना के जवानों की सुरक्षा। हर राजनीतिक दल सीमा विवाद को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को भ्रमित और गुमराह करके सत्ता में बने रहना चाहते हैं, या सत्ता में आना चाहते हैं। गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति में जाति और धर्म के आधार पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण का बोलबाला होता है और चाहते हुए भी देशवासी एकता में नहीं रह सकते। क्या देशवासियों की एकता के बिना देश शक्तिशाली बन सकता है, और क्या गठबंधन और ध्रुवीकरण की राजनीति में देशवासियों का एकता में रहना सम्भव है?


सत्यदेव चौधरी, सत्य बहुमत पार्टी के अध्यक्ष हैं।

गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति में नेताओं के झूठे, भ्रमित और आकर्षक नारों को ही लोगों ने राष्ट्र की शक्ति मान लिया, गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति को वोट और समर्थन देकर देश के मतदाताओं ने भारी भूल कर दी और आज भी कर रहे हैं, इस भूल का भारी नुकसान गरीब मतदाताओं को ही सहन करना पड़ रहा है, आने वाले समय में गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के कितने भयानक परिणाम होंगे कल्पना भी नहीं कर सकते। देश की एकता, शक्ति और प्रजातंत्र केवल राजनीतिक दलों की बैठकों के प्रदर्शन से सम्भव नहीं हैं, और न ही केवल गोला बारूद का पहाड़ बना लेने से और न ही लड़ाकू विमानों को खरीद लेने से देश शक्तिशाली बनेगा, ये सब काम करने से पहले हमें राजनीतिक व्यवस्था ऐसी बनानी चाहिए थी जिसमें प्रत्येक देशवासी, प्रत्येक मतदाता एकता, शक्ति और प्रजातंत्र का उदाहरण बनता, इस प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था न बनाकर हमारे नेताओं ने जानबूझ कर देश को और गरीबों को लूटने के लिए गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति देशवासियों के उपर थोपी। गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के रहते सेना के जवानों को शहीद होने से रोका नहीं जा सकता, बल्कि ऐसी दर्दनाक घटनाओं से गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति करने वाले नेताओं को सŸाा पर कब्जा करने का सुनहरा अवसर मिल जाता है। जवानों के शहीद होने पर हर बड़े-छोटे राजनीतिक दल एकदूसरे तीसरे पर आरोपों और आलोचनाओं की झड़ी लगाते हुए गठबंधन के नवीन समीकरण बनाकर सत्ता पर कब्जा करने के नए रास्तों की तलाश में जुट जाते हैं, और सŸाा पर कब्जा हो जाने के पश्चात जवानों के शहीद हो जाने की बात याद भी नहीं आती, क्या ये सच्चाई नहीं है? कूटनीति की बात करते समय हमें स्वयं अपनी नाड़ी का परीक्षण करके इस बात को समझ लेना चाहिए कि मजबूत कूटनीति करने के लिए क्या हम गठबंधन और ध्रुवीकरण की राजनीति में योग्य और कुशल नेताओं को चुन सकते हैं? हम कितने आत्मनिर्भर हैं, हमारी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है, हम गरीबी, बेरोजगारी, बिमारी और गंदगी में कौन से पायदान पर खड़े हैं, हम हर वर्ष आयात अधिक और निर्यात कम क्यों करते हैं, हमारे किसानों और मजदूरों सहित घरेलु उद्योगों की क्या स्थिति है, क्या हम भूख और कुपोषण के शिकार नहीं हैं, क्या हमारे सभी देशवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का प्रबंधन सुनिश्चित है, क्या हमारे समाज में अपराधों, पक्षपात और झूठ बोलने का बोलबाला नहीं है, क्या गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के कारण मतदाताओं का जातियों और धर्मों में ध्रुवीकरण होकर देश की एकता कमजोर नहीं हुई, क्या सरकारी व्यवस्था भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है, क्या गठबंधन की राजनीति में न्यायप्रिय और लोकप्रिय सरकारी व्यवस्था सम्भव है?

 कितनी ही प्रकार की अन्य बातें जो निराश करती हैं के साथ-साथ क्या ये सच्चाई नहीं है कि हमारे देश में जो भी राजनीतिक दल सŸााधारी बनता है उस राजनीतिक दल ने चुनावों में अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को अपने उम्मीदवार बनाए, उनके समर्थन में झूठे, भ्रमित और लुभावने भाषण देकर मतदाताओं को अपराधियों के पक्ष में मतदान करने के लिए विवश किया और फिर ऐसे उम्मीदवारों को जितवाकर उनके समर्थन से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बने, ऐसे नेताओं से मजबूत कूटनीति का निर्माण किस प्रकार सम्भव है? हर बार हमारी सेना के जवान तो शहीद हुए ही, हर बार हमारे भारत का भूगोल घटा भी, केवल झूलों में झूलने से और लुंगी धारण कर लेने से मजबूत कूटनीति सम्भव नहीं है।


 देश हर दृष्टिकोण से शक्तिशाली बने इसके लिए रणनीति का शक्तिशाली होना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। मुझे अपने भारत की सेना पर गर्व है, जिसके वीर जवान देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने में जरा भी विचलित नहीं होते, परन्तु सेना को अन्तिम निर्देश देने के निर्णय का अधिकार हमारी ही स्वीकार करी हुई और बनाई हुई गठबंधन की भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था के नेताओं को मिला हुआ है, जिसमें लेश भर भी सच्चाई, इमानदारी, और पारदर्शिता नहीं है। जिस राजनीतिक व्यवस्था में गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति से निर्मित नेता हों, कूटनीति के नाम पर केवल बैठकों और समझौतों की औपचारिकताएं निभाई जाती हों, ऐसी स्थिति में सेना, भले ही कितनी भी शक्तिशाली हो, अन्त में विफल ही होना पड़ता है, समझौते ही करने पड़ते हैं, ऐसा एक बार नहीं आजादी से आज तक अनेकों बार देखा गया है। गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के कारण हमारे जवान शहीद होते हैं, इसके जिम्मेवार हम स्वयं हैं, क्योंकि गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति को, नेताओं ने सोच समझकर, और देशवासियों ने अनजाने में स्वीकार किया हुआ है, और चुनावों के माध्यम से चुनकर गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति को प्रमाणपत्र भी दे रखा है। गठबंधन की राजनीति का पोषण करने के लिए सेना के जवान कब तक शहीद होते रहेंगे?


सेना के जवान शहीद होने पर ही देश के मतदाता गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई जैसे गम्भीर मुद्दों को भूलकर सत्ताधारियों के प्रति आक्रोश में आकर किसी राजनीतिक दल के साथ-साथ राजनेता का परिवर्तन करवाने में सफल हो जाते हैं, परन्तु इन मतदाताओं ने इस बात पर विचार नहीं किया कि परिवर्तन के पश्चात भी गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सेना के जवान शहीद होने समाप्त क्यों नहीं हुए? गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के कारण सेना के जवान शहीद हुए इसका मुझे गहरा दुःख है। ्सत्य बहुमत् की गठबंधनमुक्त राजनीति, गठबंधन के राक्षस को और अन्दरूनी या बाहरी जिन ताकतों के कारण हमारे जवान शहीद हुए, उन्हें चुनौति देने का साहस करके, ्सत्य बहुमत् की गठबंधनमुक्त राजनीति को स्थापित करवाके न्यायप्रिय व लोकप्रिय व्यवस्था के साथ एक भी जवान शहीद न हो ऐसी राजनीति, कूटनीति व रणनीति का निर्माण करने का संकल्प लेती है। सत्य बहुमत् के माध्यम से सकारात्मकता और आशाओं से भरे समाधान का अवसर हमारे सामने है।

वर्तमान गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति यानि सांसदों और विधायकों के बहुमत से सरकार बनाने के विकल्प में सत्य बहुमत् की गठबंधनमुक्त राजनीति यानि मतदाताओं के बहुमत से सरकार बनाने की राजनीतिक व्यवस्था से पूरे भारत में राजनीति का नया रूप देखने को मिलेगा। समझकर और सत्य बहुमत् की राजनीति से सहमत होकर ्सत्य बहुमत पार्टी् को अपना समर्थन व सहयोग देकर भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ, स्वाभिमानी, शक्तिशाली और समृद्ध राष्ट्र बनाने में सहयोगी बनकर गर्व का अनुभव करें। ्सत्य बहुमत् की राजनीति पर चर्चा करने के लिए आप कभी भी समय निश्चित करके मेरे से मिलने का कार्यक्रम बना सकते हैं। वीडियो देखकर लाइक, कमेंट, सब्सक्राइब और शेयर करें। आपके सुझाव, सहयोग और समर्थन की प्रतीक्षा में परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि हम सबको स्वस्थ व प्रसन्न रखे।



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