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दुश्मन के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए राफेल ने कसी कमर...!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 10 अगस्त 2020

फ्रांस द्वारा खरीदे गए राफेल से हिंदुस्तान दुश्मनों की नाकेबंदी करने में जुट गया है। यही कारण है कि हिंदुस्तान की धरती पर कदम रखने वाले लड़ाकू विमान राफेल अब रात के वक्त दुश्मन से सटी अपनी सीमाओं के पास गरजना शुरू कर दिए हैं। राफेल विमान दृश्य सीमा से दूर तक निशाना साधने वाले एयर-टु-एयर मिटियोर मिसाइल, एमआईसीए मल्टी मिशन एयर टु एयर मिसाइल और क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, ये हथियार फाटर पायलट को दूर से ही हमले की सुविधा देते हैं। मिटियोर मिसाइलों का नो-एस्केप जोन मौजूदा मीडियम रेंज एयर-टु-एयर मिसाइलों से तीन गुना अधिक है।


मिसाइल सिस्टम की रेंज 120 किलोमीटर तक है। स्काल्प डीप स्ट्राइक क्रूज मिसाइलों से बेहद दूर लक्ष्य को सटीकता के साथ टारगेट किया जा सकता है। भारत और चीन के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत और सैनिकों को पीछे हटाए जाने की प्रक्रिया के बावजूद सेना के तीनों अंग पूरी तरह एलएसी से लेकर समुद्र तक अलर्ट हैं। पिछले दिनों सेना अध्यक्ष एमएम नरवणे ने सेंट्रल और वेस्टर्न आर्मी कमांडर्स को यह साफ कर दिया कि एलएसी पर चीन कभी भी आक्रामकता दिखा सकता है और इसके लिए सर्वोच्च स्तर की तैयारी रखें। लद्दाख सेक्टर में जुलाई पहले सप्ताह के मुकाबले चीनी एयरफोर्स की गतिविधियां कम हुई हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना कोई चांस नहीं ले रही है और एयर मूवमेंट को बेहद सतर्कता के साथ ट्रैक किया जा रहा है, खासकर तिब्बत में ल्हासा गोंगार एयरबेस  और शिंजियांग क्षेत्र में होतन एयरबेस पर नजर है। बेहद आधुनिक समझने जाने वाले राफेल विमान रात के समय हिमाचल के पहाड़ों पर अभ्यास करने में जुटे हैं।

29 जुलाई को इंडियन एयरफोर्स के अंबाला बेस पर उतरे 5 राफेल जेट ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले साल तक भारत आने वाले 18 राफेल जेट अंबाला में तैनात रहेंगे तो 18 विमान भूटान सीमा पर हासिमारा एयरबेस पर तैयार रहेंगे। भारत ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 लड़ाकू विमानों खरीदें हैं, जिनकी डिलिवरी शुरू हो चुकी है। गोल्डन एरोज स्क्वॉड्रन के ये आसमानी योद्धा जरूरत पड़ने पर लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर एयर-टु-एयर मिसाइल और एयर टु ग्राउंड मिसाइलों के साथ दुश्मन को तबाह कर सकें। इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों के अनुसार ये विमान एलएसी से दूर रह रहे हैं ताकि अक्साई चिन में तैनात पीएल के रडार इसके फ्रीक्वेंसी सिग्नेंचर को ना पहचान सकें, क्योंकि खराब स्थिति में वे इनका इस्तेमाल जैम करने के लिए कर सकते हैं।


हालांकि, मिलिट्री एविएशन के एक्सपर्ट कहते हैं कि राफेल का इस्तेमाल लद्दाख में ट्रेनिंग के लिए भी हो सकता है, क्योंकि इन विमानों में युद्ध जैसी स्थिति में अपना सिग्नल फ्रीक्वेंसी बदल लेने की क्षमता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ''चाइनीज पीएलए ने अपने इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस रडार्स को अक्साई चिन में पहाड़ों के ऊपर लगाया है ताकि उन्हें बेहतर सूचना मिल सके, लेकिन युद्ध के समय राफेल के सिग्नेचर सिग्नल प्रैक्टिस मोड से अलग होंगे। पीएल के एयरक्राफ्ट डिटेक्शन रडार अच्छे हैं, क्योंकि उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।'




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