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सेहत की बातें

कोरोना वैक्सीन: सरकार ने कहा सबको नहीं लगेगी वैक्सीन...!

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली

1 दिसंबर 2020

अगर आप इस इंतजार में हैं कि कोरोना की वैक्सीन बनने के बाद आप उसे लगवाएंगे तो आप गलत सोच रहे हैं। हो सकता है कि आपको टीका न लगे। दरअसल देश में सभी को कोरोना का टीका नहीं लगेगा। सरकार ने मंगलवार को साफ किया कि उसने कभी नहीं कहा है कि पूरी जनसंख्या को टीका लगाया जाएगा। सिर्फ उतनी ही आबादी का टीकाकरण किया जाएगा, जिससे कोरोना संक्रमण की कड़ी टूट जाए। सरकार ने ऑक्सफर्ड वैक्सीन के ट्रायल को भी जारी रखने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने कहा, 'मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सरकार ने कभी नहीं कहा है कि पूरे देश का टीकाकरण किया जाएगा।


टीकाकरण वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता पर निर्भर करेगा। हमारा उद्देश्य कोविड-19 संक्रमण की कड़ी को तोड़ना है। अगर हम जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन देने में सफल होते हैं और संक्रमण की कड़ी को तोड़ने में सफल होते हैं तो पूरी आबादी के टीकाकरण की जरूरत ही नहीं होगी।' सरकार ने ऑक्सफर्ड वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने वाले तमिलनाडु के एक शख्स पर कथित दुष्प्रभाव से वैक्सीन की टाइमलाइन प्रभावित होने की आशंका को खारिज किया है। हेल्थ सेक्रटरी राजेश भूषण ने कहा कि इससे टाइमलाइन प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब भी क्लीनिकल ट्रायल स्टार्ट होते हैं तो जो वॉलंटियर इसमें हिस्सा लेते हैं वे पहले ही एक सहमति पत्र पर दश्तखत करते हैं। पूरी दुनिया में यही होता है। फॉर्म में वॉलंटियर को बताया जाता है कि ट्रायल में कुछ दुष्रप्रभाव भी हो सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश के ग्रामीण इलाकों में नए कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि शहरी इलाकों में कोविड-19 महामारी से थोड़ी-थोड़ी राहत मिलती दिख रही है। इन 284 जिलों के 55.3% यानी 157 जिले ग्रामीण इलाकों के हैं। वहीं, 21.1% यानी 60 जिले अर्ध-शहरी जबकि 16.9% यानी 48 जिले शहरी इलाकों के हैं। ध्यान रहे कि सितंबर में हर दिन औसतन 90 हजार नए केस आ रहे थे। यानी, जिन 284 जिलों में नए कोरोना मामलों की बाढ़ आ रही है, उनमें 80% से ज्यादा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के हैं जहां लचर स्वास्थ्य व्यवस्था है।

शहरी क्षेत्रों से थोड़ी राहत की खबर आ रही है जहां शुरुआत में कोरोना ने अपनी जड़ें जमा ली थीं। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में 77% कोरोना केस शहरी क्षेत्रों में ही थे जबकि सिर्फ 10% केस ही ग्रामीण इलाकों में पाए गए थे। लेकिन, 29 नवंबर को कोरोना मामलों में शहरी क्षेत्र की हिस्सेदारी घटकर 52% रह गई। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़कर 24% जबकि अर्ध-शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी 21% हो गई। अगर ग्रामीण और अर्ध-शहरी जिलों को मिला दिया जाए तो अपैल के मुकाबले नवंबर में नए कोरोना मामलों की रफ्तार घटती दिखती है। लेकिन, इसका प्रमुख कारण हर जिले के कुल मामलों और टेस्टिंग रेट में भारी अंतर है। कुछ जिलों में बहुत ज्यादा मामलों के कारण बाकी जिलों का औसत भी बढ़ गया है। 1,000 से ज्यादा कोरोना मामलों वाले इन 19 जिलों में अब तक के कुल कोरोना मामलों में आधे अकेले नवंबर में आए हैं। इनमें सिर्फ दो गुरुग्राम और फरीदाबाद शहरी, दो गंगानगर और हिसार अर्ध-शहरी जबकि 12 जिले ग्रामीण जिले हैं। छत्तीसगढ़ के बामेतारा, बालोद और कोरबा जिलों को शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों के आधार पर बंटवारा नहीं हुआ है। आंकड़े निकालते वक्त तेलंगाना, असम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मणिपुर और सिक्किम को शामिल नहीं किया गया क्योंकि वहां डिस्ट्रिक्ट लेवल के डेटा उपलब्ध नहीं हैं।


50,000 से ज्यादा कोरोना केस वाले 19 जिलों में नवंबर महीने में अब तक के कुल केस के सिर्फ 10% केस ही आए। इनमें सिर्फ दो ग्रामीण इलाकों के हैं। शहरी जिलों में कोरोना केस की रफ्तार घटने का मतलब है कि इन इलाकों में महामारी नियंत्रण में आ रही है।




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