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55 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिंदी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा क्यों नहीं..?
विदेश मंत्रालय द्वारा विश्व हिंदी दिवस मनाए जाने का प्रतीकात्मक उत्सव कब तक..?

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

11 जनवरी 2021

9 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली फ्रेंच भाषा, 17 करोड़ की रूसी और 40 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली अंग्रेजी भाषा यदि संयुक्त राष्ट्र की भाषा बन सकती है तो 55 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिंदी संयुक्त राष्ट्र की भाषा क्यों नहीं बन सकती है। जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा हर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है यह सवाल हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाए जाने वाले विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम के दौरान हर हिंदी प्रेमियों के मन में उठती है। हम बता दें कि विश्व-पटल पर हिन्दी बोलने वालों की संख्या दूसरे स्थान पर होने के बावजूद इसे संयुक्त राष्ट्र में शामिल नहीं किया गया है।


सांकेतिक तस्वीर।

यही नहीं, भारतीय और अनिवासी भारतीयों को जोड़ दिया जाए तो हिन्दी पहले स्थान पर आकर खड़ी हो जाती है। भाषायी आंकड़ों की दृष्टि से जो सर्वाधिक प्रमाणित जानकारियां सामने आई हैं, उनके आधार पर संरा की 6 आधिकारिक भाषाओं की तुलना में हिन्दी बोलने वालों की स्थिति निम्न है- मंदारिन 80 करोड़, हिन्दी 55 करोड़, स्पेनिश 40 करोड़, अंग्रेजी 40 करोड़, अरबी 20 करोड़, रूसी 17 करोड़ और फ्रेंच 9 करोड़ लोग बोलते हैं। हिन्दी भारत के अलावा नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गयाना, त्रिनिनाद, टुबैगो, सिंगापुर, भूटान, इंडोनेशिया, बाली, सुमात्रा, बांग्लादेश और पाकिस्तान में खूब बोली व समझी जाती है। भारत की राजभाषा हिन्दी है तथा पाकिस्तान की उर्दू, इन दोनों भाषाओं के बोलने में एकरूपता है। दोनों देशों के लोग लगभग 60 देशों में आजीविका के लिए निवासरत हैं। इनकी संपर्क भाषा हिन्दी मिश्रित उर्दू अथवा उर्दू मिश्रित हिन्दी है। हिन्दी फिल्मों और दूरदर्शन कार्यक्रमों के जरिए भी हिन्दी का प्रचार-प्रसार निरंतर हो रहा है। विदेशों में रहने वाले 2 करोड़ हिन्दीभाषी हिन्दी फिल्मों, टीवी सीरियलों और समाचारों से जुड़े रहने की निरंतरता बनाए हुए हैं। ये कार्यक्रम अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हॉलैंड, दक्षिण अफीका, फ्रांस, थाईलैंड आदि देशों में रहने वाले भारतीय खूब देखते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या 191 है। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए योग दिवस की तरह एक प्रस्ताव लाना होगा जिस पर 129 देशों की सहमति अनिवार्य होगी। यह सहमति बन जाती है तो संरा के विधान की धारा 51 में संशोधन होगा और उसमें संयुक्त राष्ट्र की भाषा के रूप में हिन्दी जुड़ जाएगी। हिन्दी संयुक्त राष्ट्र की भाषा बन जाती है तो इसे देश की राष्ट्रभाषा बनने में भी ज्यादा समय नहीं लगेगा। ऐसा होता है तो भारतवासियों के लिए भाषायी दासता से मुक्ति का द्वार भी खुलने लग जाएगा।


सांकेतिक तस्वीर।

भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसकी 5 भाषाएं विश्व की 16 प्रमुख भाषाओं की सूची में शामिल हैं। 160 देशों के लोग भारतीय भाषाएं बोलते हैं। विश्व के 93 देश ऐसे हैं जिनमें हिन्दी जीवन के बहुआयामों से जुड़ी होने के साथ विद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाई जाती है। चीनी भाषा मंदारिन बोलने वालों की संख्या हिन्दी बोलने वालों से ज्यादा जरूर है, किंतु अपनी चित्रात्मक जटिलता के कारण इसे बोलने वालों का क्षेत्र चीन तक ही सीमित है। शासकों की भाषा रही अंग्रेजी का शासकीय व तकनीकी क्षेत्रों में प्रयोग तो अधिक है किंतु उसके बोलने वाले हिन्दी भाषियों से कम हैं। 1945 में संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाएं 4 थीं- अंग्रेजी, रूसी, फ्रांसीसी और चीनी। ये भाषाएं अपनी विलक्षणता या ज्यादा बोली जाने के बनिस्बत संयुक्त राष्ट्र की भाषाएं इसलिए बन पाईं थीं, क्योंकि ये विजेता महाशक्तियों की भाषाएं थीं। बाद में इनमें अरबी और स्पेनिश शामिल कर लीं गई। जाहिर है, हिन्दी संरा की अग्रिम पांक्ति में खड़ी होने का वैध अधिकार रखती है। हिन्दी के साथ एक और विलक्षणता जुड़ी हुई है। हिन्दी जितने राष्ट्रों की जनता द्वारा बोली व समझी जाती है, संयुक्त राष्ट्र की पहली 4 भाषाएं उतनी नहीं बोली जाती हैं।





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