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धर्म/तीज़-त्यौहार

विख्यात कोईरीपुर के शिवालय की अष्टधातु की मूर्ति पुजारी ने ही बेच दी
पुजारी की नजर मंदिर और आस-पास के 52 बीघे पर थी

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

कोईरीपुर, सुलतानपुर, उ. प्र., 3 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के अंतर्गत आता है कोईरीपुर बाजार। कोईरीपुर बाजार जनपद मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर है। कोईरीपुर एक अन्य वजह से भी पूरे क्षेत्र में विख्यात है। कोईरीपुर में एक भगवान शिव का विशाल मंदिर है। बाबा भोले नाथ के इस मंदिर की वजह से कोइरीपुर, कोईरीपुर शिवालय के नाम से पूरे इलाके में विख्यात है। मंदिर के सामने से वाराणसी और लखनऊ को जोड़ने वाले चार लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हो रहा है। यह मंदिर काफी ऐतिहासिक और पुराना है। कहा जाता है कि बाबा भोले नाथ के इस मंदिर की नींव कोईरीपुर के रहने वाले सेठ जीतलाल जायसवाल ने रखी थी। 

आज इनकी आठवीं पीढ़ी चल रही है। इस तरह से देखा जाए तो यह मंदिर कम से कम चार पांच सौ साल पुराना है। जीतलाल जायसवाल के पीढी में मौजूद कृष्ण कुमार जायसवाल के पास मंदिर का मालिकाना हक है। सेठ जीतलाल जायसवाल कोईरीपुर के बड़े सेठ में गिने जाते थे जिनका सोना चांदी का लंबा कारोबार था।  कोईरीपुर का तहसील लंभुआ है और ब्लॉक चांदा लगता है। लंभुआ से लगभग 17 और चांदा से लगभग 4 किमी दूर है यह शिवालय। यहां के स्थानीय लोग कहते हैं मंदिर अंग्रेजों के शासन से भी काफी समय पहले का बना है। पहले यहां अंग्रेज भी आते थे। कोईरीपुर शिवालय क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बिंदु है। 52 बीघे में फैला मंदिर कभी रौनकता से भरा हुआ करता था। एक समय था जब आए दिन यहां बड़े बड़े यज्ञ हुआ करते थे। मंदिर के सामने उत्तर दिशा की ओर एक बड़ा तालाब हुआ करता था। यहां पर हाथी पाले गए थे जो तालाब में नहाते थे। बाहर से साधु सन्यासी यहां धूनी जमाया करते थे। इलाके का पूरा क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों सें गुंजायमान रहता था। कोईरीपुर का मेला भी ऐतिहासिक के साथ धार्मिक है। शिवरात्रि के दिन कोईरीपुर शिवालय में भगवान शिव की पूजा देखते ही बनती है।

लेकिन आज की स्थिति में मंदिर परिसर का पूरा इलाका जीर्ण शीर्ण अवस्था में बदल चुका है। न वह पुरानी रौनक है न चहल पहल है। मंदिर के सामने से राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तारीकरण की वजह से मंदिर के सामने का एक बड़ा हिस्सा अब राष्ट्रीय राजमार्ग के कब्जे में आ चुका है। वर्तमान में मंदिर की स्थिति दयनीय है। बगल की रहने वाली स्थानीय निवासी आरती यादव कहती हैं कि मंदिर परिसर में एक वीरेंद्र सिंह रहते थे जिन्होंने मंदिर को गर्त में लाकर खड़ा कर दिया। वीरेंद्र सिंह कोईरीपुर से तकरीबन 8-9 किमी दूर सैफाबाद के मूल निवासी हैं। वीरेंद्र सिंह हरिद्वार के शांतिकुज गायत्री परिवार से भी जुड़े थे। 1998 में यहां शिवालय में एक भव्य यज्ञ कराया गया। जिसमें हजारों लोग जुटे थे। आरती यादव कहती हैं कि यज्ञ के बहाने वीरेंद्र सिंह और कुछ लोग मंदिर के 52 बीघे पर अपनी नज़र गड़ाकर रखी थी। 

आरती यादव खुद कहती हैं मंदिर परिसर में जो भी गलत इरादे लेकर आए उनके खिलाफ वे डटकर मुकाबला करती रहीं यही कारण है कि कई लोगों ने उन्हें जान से भी मारने की धमकी दी लेकिन भोले बाबा की ऐसी कृपा रही कि कोई बाल बांका उनका नहीं कर सका। आरती कहती हैं कि बीरेंद्र सिंह जो परिवार के साथ मंदिर परिसर में लगभग 20-22 साल तक रहे उन्होंने मंदिर के गर्भ गृह में रखे अष्ट धातु की मूर्ति चोरी कर ली और जैसी मूर्ति थी वैसे हू बहू बनवाकर रख दी। आरती कहती हैं वीरेंद्र सिंह ने यहां आने वाले साधुओं तक को रूकने नहीं दिया।

फिलहाल आज की तारीख में बाबा भोले नाथ का यह मंदिर अत्यंत दयनीय स्थिति से गुजर रहा है। मंदिर के उत्तरी छोर को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पहले तहस नहस कर चुका है। मंदिर को संचालित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। न ही मंदिर के पास अब किसी तरह का कोई कोष है जिससे लगभग 4-5 सौ पुराने इस  भव्य मंदिर की भव्यता को लौटाया जा सके। फिलहाल भगवान शिव का समूचा परिसर अपने किसी ऐसे भक्त की राह जोह रहा है जो उसके पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक वैभव के दिन को लौटा सके। 



कोईरीपुर शिवालय।





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