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उत्तर रेलेव का दिल्ली डिवीजन बना भ्रष्टाचार का अड्डा!
एक खास कंपनी को टेंडर देने में भारी भ्रष्टाचार?

आकाश श्रीवास्तव

नई दिल्ली, ६ जुलाई २०१८

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

उत्तर रेलवे के दिल्ली डिविज़न (वाणिज्य विभाग) द्वारा दिनांक 20/04/2018 को बी. ओ॰ टी. आधार पर शौचालयों के निर्माण  एवं रख रखाव के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। इस टेंडर के दस्तावेज को देखकर लगता है कि इस पूरे मामले में वित्तीय दस्तावेज़ के माध्यम से भारी धाँधली की गयी है। उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के वाणिज्य विभाग को जानकारी होने और त्रुटि की जानकारी होने के बावजूद इस प्रकार से आनन- फ़ानन में टेंडर को तुरंत आवंटित करने की कोशिश पूर्णता गैरक़ानूनी होने के साथ साथ इस विभाग में हों रहे भ्रष्टाचार, धाँधली व अधिकारियों के निरंकुश व्यवहार का एक ज्वलंत उदाहरण है।


रेल नियमों के अनुसार वित्तीय  दस्तावेज़ के अनुसार कम्पनियों द्वारा अपनी कोटेड राशि को अंकों व शब्दों में  लिखना अनिवार्य होता है। इसी दस्तावेज के क्रमांक (२) में लिखा है कि अंक तथा शब्दों में लिखी राशि में अन्तर की स्थिति में शब्दों में लिखी राशि मान्य होगी। वहीं क्रमांक (७) के अनुसार अंक व शब्दों में अंतर कीं स्थिति में अंक में लिखी राशि मान्य होगी।   इस पूरे मामले को लेकर तथा एक भारी त्रुटि मानते हुए तुरंत सम्बंधित अधिकारियों को सूचित किया गया कि इस त्रुटि को ठीक कर सही विवेचना के साथ पुनः टेंडर आमंत्रित किया जाए। परंतु  आश्चर्यजनक रूप से इसका संज्ञान ना लेते हुए इसी त्रुटि के साथ आर. एम. ओ. टी. आधार पर दिनांक 14/06/2018 को एक अन्य टेंडर आमंत्रित कर दिया गया। पूरे मामले को देखकर लगता है कि ऐसा एक सोची समझी रणनीति के तहत अपनी पसंदीदा कम्पनी को  फ़ायदा पहुँचाने के लिए किया गया है। सूत्रों के अनुसार अधिकारी इस आधे-अधूरे टेंडर के साथ इसे अंतिम रूप देने में लगे हैं?

दस्तावेज को देखने के लिए क्लिक करें


सूत्रों के अनुसार उत्तर रेलवे में बैठे कुछ खास अधिकारियों ने बड़ी होशियारी से भ्रष्टाचार की तानाबाना बुना है। जिसमें कम्पनी को टेंडर ना मिलने की स्थिति में इसे त्रुटि मानते हुए निरस्त कर  दिए जाने की भी तैयारी है। जबकि अपनी कम्पनी को मिलने की स्थिति में यह एक सामान्य लिपिक त्रुटि बताकर कम्पनी को भारी लाभ पहुंचाने की खाका तैयार कर लिया गया है।


यही नहीं इस हमने पूरे प्रकरण की जानकारी से उत्तर रेलवे के डीआरएम कार्यालय (वाणिज्य विभाग) को अवगत कराया, लेकिन हमें कोई संतोषजनक जानकारी डीआएम कार्यालय से नहीं मिली। हां इतना जरूर कहा गया है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच की जा रही है। उत्तर रेलवे के डीआरएम वाणिज्य विभाग की तरफ इस तरह की जवाबदेही से महज मामले की लीपापोती करने के अलावा और कुछ नहीं लगता है।


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