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भारतीय अधिकारियों ने अफगान महिला सांसद को हवाई अड्डे से वापस लौटाया

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2021

नई दिल्ली हवाई अड्डे से लौटाई गईं अफ़ग़ानिस्तान की सांसद रंगीना करगर ने कहा है कि अब वो भारत नहीं आएँगीं। इस्तांबुल से एक समाचार चैनल से बात करते हुए करगर ने कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान की एक चुनी हुई प्रतिनिधि हैं और उन्हें भारत से बेहतर व्यवहार की उम्मीद थी। रंगीना करगर मूल रूप से अफ़ग़ानिस्तान के फ़रयाब प्रांत से हैं और उनका परिवार इन दिनों काबुल में है। रंगीना, उनका एक साल का बच्चा और पति इस समय इस्तांबुल में हैं।

रंगीना ने समाचार एजेंसी को बताया, "मैं 21 अगस्त की सुबह छह बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुँची थी, दुर्भाग्यवश उन्होंने मुझे भारत में दाख़िल नहीं होने दिया गया। उन्होंने मुझे दुबई के रास्ते वापस इस्तांबुल लौटा दिया। रंगीना कहती हैं, "अधिकारियों से मैंने कहा कि मैं एक अकेली महिला हूँ और सांसद हूँ, लेकिन उन्होंने मुझे सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हुए वापस लौटा दिया। रंगीना के मुताबिक़ इस घटनाक्रम के बाद भारत सरकार के प्रतिनिधि ने उनसे संपर्क किया और भारत का इमरजेंसी वीज़ा देने का प्रस्ताव दिया है।

रंगीना डिप्लोमेटिक पासपोर्ट पर भारत पहुँची थीं. इस पासपोर्ट धारक को अफ़ग़ानिस्तान के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत में बिना वीज़ा दाख़िल होने की अनुमति है. अफ़ग़ानिस्तान भी भारत के राजनयिकों को ये सुविधा देता था। लेकिन एयरपोर्ट पर तैनात कर्मचारियों ने रंगीना करगर को फ़्लाइट दुबई से वापस इस्तांबुल भिजवा दिया था। रंगीना कहती हैं, "भारत की तरफ़ से जेपी सिंह ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि मुझे आपात वीज़ा के लिए अप्लाई करना चाहिए। मेरा एक साल का बच्चा है, मैं उसे भी अपने साथ ले जाना चाहती थी और मैंने उसके लिए ई-वीजा अप्लाई किया था लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला। 

जेपी सिंह भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं और ईरान, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े मामलों के प्रभारी हैं। रंगीना कहती हैं, "मैंने भारत की अपनी फ़्लाइट से पहले अपने बच्चे के लिए वीज़ा आवेदन दिया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। रंगीना कहती हैं, "एक बार भारत ने मुझे लौटा दिया है, अब मैं निकट भविष्य में भारत नहीं आ पाऊँगी। तालिबान पर भरोसा नहीं कर सकते, वो सबको पीट रहे हैं' रंगीना इस समय अपने पति और बच्चे के साथ इस्तांबुल में हैं, लेकिन उनके परिवार के अधिकतर सदस्य काबुल में हैं. वो अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं।

रंगीना कहती हैं, "मेरे परिवार के लोग सरकार की तरफ़ से तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे, लेकिन अब तालिबान सत्ता में है. अफ़ग़ानिस्तान में हालात बहुत ख़राब हैं। मैं हर पल अपने परिजनों को लेकर चिंतित हूँ। मैं भारत सरकार से यही कहना चाहूँगी कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और भारत सरकार के बीच संबंध बहुत अच्छे थे। हमने एक दूसरे का बहुत सहयोग किया है। मैं एक सांसद हूँ, मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि भारत में मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया जाएगा. मैं एक महिला हूँ, मैं अकेली यात्रा कर रही थी, दुनिया ने अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए अपने दरवाज़े खोले हैं लेकिन भारत ने मुझे लौटा दिया। 

मैं इस बर्ताव की आलोचना करती हूँ। वो कहती हैं, "मुझे एयरपोर्ट से लौटाए जाने के बाद ही भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के हिंदुओं और सिखों को भारत आने दिया था। हम भारत के सहयोगी हैं और हमें भारत से बेहतर व्यवहार की उम्मीद थी। आइए जानते हैं कि भारतीय विदेश मंत्रालय का इस बारे में क्या कहना है। वहीं रिपोर्टों के मुताबिक़ भारत सरकार ने माना है कि रंगीना के मामले में ग़लती हुई है और उनसे संपर्क किया गया है। ये मामला गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में उठा था, जिसमें सरकार ने ये बात कही है।

रिपोर्ट मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत के कॉन्सुलेट और दूतावास में मौजूद अफ़ग़ानी नागरिकों के पासपोर्ट तालिबान ले गए थे जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों अफ़ग़ानिस्तान से भारत आ रहे लोगों को लेकर चौकन्नीं थीं और इसी वजह से रंगीना को वापस लौटाया गया था। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर क़ब्ज़ा कर लिया था और इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़कर चले गए थे। भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों के लिए आपात ई-वीज़ा की घोषणा की है। लेकिन अफ़ग़ानिस्तानी नागरिकों का कहना है कि उन्हें ये वीज़ा आसानी से नहीं मिल पा रहा है।









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