ताज़ा समाचार-->:
अब खबरें देश-दुनिया की एक साथ एक जगह पर-->

विज्ञान एवं रक्षा तकनीकि

रक्षा बजट 2022: सुरक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत के दो कदम: एक आकलन

मेजर जनरल जे.के.एस. परिहार (सेवा निवृत)

रक्षा, सामरिक एवं अंतराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 2 फरवरी 2022

वर्ष 2022-23 के प्रस्तावित रक्षा बजट पिछले वित्तीय वर्ष के ₹4,84,019 करोड़ (69 बिलियन $) आवंटन के मुक़ाबले 9% अधिक ₹525166 (74 बिलियन $) है.यदपि मुद्रा स्फीति दर को  देखते हुए  यह वृद्धि काफी कम है. रक्षा बजट में केपिटल हेड में 1,52369 करोड़ तथा  233000.54 करोड़, राजस्व खाते में  राजस्व एवं वेतन तथा 1,19696 करोड़ रुपये पेंशन इत्यादि के लिए आवंटित हैं. इस वर्ष पेंशन बजट में 8825 करोड़ की कटौती  प्रस्तावित है.केपिटल हेड के अंतर्गत हुए आवंटन में थल सेना को 32015 करोड़,वायु सेना को 55586 करोड़ तथा नौसेना को 47590  करोड़ आधुनिकरण, उपकरणों के बदलाव इत्यादि के लिए आवंटित हैं.हालांकि केपिटल आवंटन चीन और पाकिस्तान की भारत के विरुद्ध बढ़ती गतिविधियों से मुकाबला करने के लिए अधिक संसाधनों की आपूर्ति तथा तीनों सेनाओं के आधुनिकरण और आवश्यकताओं से करीब 35 % कम है.राजस्व खाते में थल सेना को 1,64897 करोड़,वायु सेना को 32873 करोड़ तथा नौसेना को 25406 करोड़ आवंटित किए गए हैं. यद्यपि आयुध फैक्ट्रीज़ के निजीकरण के पश्चात पिछले  वर्ष के 4254 करोड़ के मुकाबले सिर्फ 474 करोड़  होने से राजस्व मद में अतिरिक्त  राशि उपलब्ध हो गई।

रक्षा बजट में डीआरडीओ रिसर्च फंड में 9% वृद्धि  के साथ 9348  करोड़ का आवंटन किया  गया  है जिसमें  पहली  बार 25% आवंटन  रक्षा  अनुसंधान  में निजी  क्षेत्रों की भागीदारी के  लिए  है . साथ ही  आधुनिक  तकनीकि  के मानकीकरण के स्वायत्त संस्थान का  निर्मित किया जाना भी प्रशंसनीय है. इसी प्रकार रक्षा सामग्री  एवं  हथियारों  की  खरीदी में केपिटल बजट के  68% आवंटन की खरीद   स्वदेशी उद्योगों से  होगी . यह कदम  सुरक्षातंत्र के आधुनिकरण एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु  रक्षा क्षेत्र में  एक ऐसी प्रणाली विकसित करने में सहायक  होगा   जिसमें स्वदेशी निर्माताओं को नियमित प्रोत्साहन एवं  हथियारों  के   निर्यात को  प्राथमिकता होगी। एक  आकलन के  अनुसार जहां अमेरिका का रक्षा व्यय 752 बिलियन   डॉलर , चीन 250, रूस 76.4,ब्रिटेन  59.2 एवं सऊदी अरब 57.5 बिलियन डॉलर है, वहीं   भारत का कुल प्रस्तावित  रक्षा बजट 74  बिलियन डॉलर ही है जो कि आवश्यकता से  बहुत कम है.इसी प्रकार विभिन्न देश रक्षा बजट के आकलन में अलग अलग मापदंड अपनाते हैं और वास्तविक व्यय तथा घोषित व्यय में पारदर्शिता का अभाव रहता है,अधिकतर देश रक्षा उपकरणों के क्रय  तथा इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को ही रक्षा बजट मानते हैं तथा वेतन तथा पेंशन ,राजस्व खर्च को अलग रखते हैं. इस तथ्य के वावजूद भारत का कुल रक्षा व्यय जीडीपी के 2  प्रतिशत और सरकार के कुल व्यय बजट के  16 प्रतिशत के आधार पर अन्य देशों से काफी कम है जहां सऊदी अरब 8 % तथा अन्य देश   3 से 4.5 % तक सुरक्षा पर व्यय करते है. वैसे भी भारत की भौगोलिक और सामरिक परिस्थितियों के हिसाब से हमारे सैन्य बलों तथा  रक्षा व्यय में अधिक कटौती की गुंजाइश नहीं है अपितु सेना तंत्रों के एकीकरण ,थियेटर कमान ,बैटल ग्रुप जैसे संभावित  बदलाव के लिए भी अतिरिक्त आवंटन आवश्यक है .अतः  बजट आवंटन की प्रक्रिया में केपिटल हेड में रक्षा व्यय को एक समय बद्ध प्रक्रिया के अंतर्गत जीडीपी के तीन प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए.इसी प्रकार राजस्व और वेतन एवम् पेंशन इत्यादि व्यय तत्कालीन आवश्यकता के अनुरूप अलग से आवंटित किया जाना चाहिए।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अमेरिका एवं रूस इत्यादि देशों का रक्षा व्यय उनकी भौगोलिक सीमाओं की रक्षा हेतु कम तथा मुख्यतया उनकी अंतरराष्ट्रीय सामरिक महाशक्ति की आकांक्षा और भूमिका पर आधारित है, इसी प्रकार चीन का भारी भरकम रक्षा व्यय उसकी विस्तारवादी ,अतिक्रमणवादी खासकर भारत और दक्षिण एशियाई देशों के खिलाफ है, जबकि पाकिस्तान का पूरा रक्षातंत्र भारत के खिलाफ परोक्ष अथवा अपरोक्ष युद्ध तंत्र के रूप में ही है. इसके विपरीत भारत  का रक्षा तंत्र ना केवल चीन और पाकिस्तान के बढ़ते खतरों के मुकाबले अपनी भौगोलिक सीमाओं की रक्षा के किए आवश्यक है अपितु अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में हमारे जल क्षेत्रों तथा भारत की बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारी के अनुरूप एक चुस्त दुरुस्त और एक अति आधुनिक सैन्यतंत्र के रूप में  अगले 30 वर्षों में ना केवल थल ,नभ और जल बल्कि अंतरिक्ष ,साइबर , आर्टिफिसियल इंटेलिजेन्स,लेसर  एवं  परमाणु इत्यादि क्षेत्रों में होने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम हों. बजट  में दूर दराज और सीमा क्षेत्रों में सड़क रेल एवम वायु मार्ग से परिवहन ,भवन निर्माण ,वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था तथा संचार सुविधाओं के  विकास लिए सामान्य  बजट से आवंटन हमारी सामरिक क्षमता में वृद्धि के लिए दूरगामी प्रभाव और उपरोक्त क्षेत्रों में सैन्य बजट को संतुलित करने का अत्यंत सराहनीय कदम है।



सांकेतिक तस्वीर।





जरा ठहरें...
भारत ने हाई ब्रिड मिसाइल का किया परीक्षण, मारक क्षमता 3 हजार किमी
भारत ने बनाया अपना पहला केंद्रीय एकीकृत राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी डाटा केंद्र
अब देश में बनेंगे सैन्य परिवहन विमान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया शिलान्यास
डीआरडीओ ने AD-1 इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया
समुद्री सीमा में पारस्परिक संबंध बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना का तीन देशों के साथ अभ्यास
भारतीय तट रक्षक बल किसी से कम नहीं, हर चुनौती से निपटने को तैयार
डिफेंस एक्सपो 2022: आत्मनिर्भरता और स्वदेशी पर जोर
एक विशेष अभियान में भारतीय नौ सेना ने 2 सौ किलो नशीला पदार्थ जब्त किया
उत्तर रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी और दुलर्भ परियोजना का रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने जायजा लिया
बार के दो नए विध्वंसक युद्धपोतों ने समुद्र में कसी कमर
भारतीय वायुसेना ने अपने महानायक मार्शल अर्जुन सिंह को किया याद!
वायुसेना ने देवघर में बचाव कार्य को पूरा किया
डीआरडीओ ने सरफेस टू एयर मिसाइल का सफल परीक्षण किया
भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में "बड़ी छलांग"लगाई – डॉ जितेंद्र सिंह
भारतीय जैव-जेट ईंधन प्रौद्योगिकी को औपचारिक सैन्य प्रमाणन प्राप्त मिला
वायुसेना ने भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए चिंतन मंथन शुरू किया
राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में उन्नत 650 टेराफ्लॉप्स सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं का उद्घाटन
भारतीय वायु सेना ने पश्चिमी वायु कमान में 'यूनिटी रन' का आयोजन किया
अमेरिकी नौसेना के प्रमुख एडमिरल माइकल गिल्डे, नौसेना के चीफ एडमिरल करमवीर से मिले
समय से पहले सारे राफेल मिल जाएंगे भारत को - फ्रांस
लद्दाख में चीनी वायुसेना तीन एअरबेस पर मौजूद – मुकाबले के लिए हम तैयार – वायुसेना प्रमुख
पुरानी बीमारी महामारी विज्ञान तथा जटिल सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप पर काम कर रहे चित्रा
सरकार ने स्पेन से 56 ‘सी-295’ सैन्य परिवहन विमानों की खरीदी के लिए अनुबंध किया
साढ़े सात हजार करोड़ रूपए में 118 अर्जुन टैंकों की खरीद की मंजूरी
ध्वनि की गति से 24 गुना तेज चलने वाली अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण जल्द
वायुसेना ने देश में आक्सीजन की कमी को दूर करन के लिए कमर कसी
 
 
Third Eye World News
इन तस्वीरों को जरूर देखें!
Jara Idhar Bhi
जरा इधर भी

Site Footer
इस पर आपकी क्या राय है?
चीन मुद्दे पर क्या सरकार ने जितने जरूरी कठोर कदम उठाने थे, उठाए कि नहीं?
हां
नहीं
पता नहीं
 
     
ग्रह-नक्षत्र और आपके सितारे
शेयर बाज़ार का ताज़ा ग्राफ
'थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़' अब सोशल मीडिया पर
 फेसबुक                                 पसंद करें
ट्विटर  ट्विटर                                 फॉलो करें
©Third Eye World News. All Rights Reserved.