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भारत ने बनाया अपना पहला केंद्रीय एकीकृत राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी डाटा केंद्र
केंद्रीय विज्ञान और प्रोद्योगिकी राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार, जितेंद्र सिंह ने राष्ट्र को किया समर्पित

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2022

भारत ने अपना पहला केंद्रीय एकीकृत राष्ट्रीय जैव प्रौदोयोगिकी डाटा केंद्र स्थापित कर लिया है। भारत के लिए यह एक आसाधारण उपलब्धि है। यह एक ऐसा डाटा केंद्र है जिसमें पृथ्वी पर रहने वाले, मानव एवं अन्य जीव जंतु और वनस्पति सभी के डाटा यहां पर कैद होगा। हम आपको यदि सरल भाषा में समझाएं तो भारत द्वारा तैयार किए गए इस जैव डाटा केंद्र में जीन्स, डीएनए, आरएन, उसकी इंजीनियरिंग आदि का विस्तृत जैविक लेखा जोखा यहां इक्टठा करके रखा जाएगा। और जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियां अथवा शोधकर्ता उसका विश्लेषण कर सकेंगें। या इसे ऐसे समझा जा सकता है पिछले दो साल में कोरोना से संबंधित देश में जितने शोध और विश्लेषण हुए हैं उन सभी का संपूर्ण डाटा इस केंद्र से जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान अपने शोध अथवा उपयोग के लिए यहां से डाटा प्राप्त कर सकते हैं। अभी तक भारत ज्यादातर डाटा के लिए दूसरे देशों जैसे अमेरिका और इंग्लैड पर निर्भर रहता था लेकिन अब भारत का खुद का राष्ट्रीय डाटा केंद्र देश के लोगों को मिल चुका है। यह भारतीय वैज्ञानिकों, तकनीशियनों के लिए गौरव का दिन है। जिनकी मेहनत के बदौलत यह संभव हुआ।
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, (स्वतंत्र प्रभार)  डॉ जितेंद्र सिंह ने हरियाणा के  फरीदाबाद, में स्थिति जीवन विज्ञान डेटा-'इंडियन बायोलॉजिकल डेटा सेंटर' (IBDC) के लिए भारत का पहला राष्ट्रीय डाटा केंद्र राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत सरकार के बायोटेक-प्राइड दिशानिर्देशों के अनुसार, आईबीडीसी को भारत में सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान से उत्पन्न सभी जीवन विज्ञान डेटा को संग्रहीत करने के लिए अनिवार्य है। डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि आईबीडीसी ने दो डेटा पोर्टलों के माध्यम से न्यूक्लियोटाइड डेटा सबमिशन सेवाएं शुरू की हैं। 'इंडियन न्यूक्लियोटाइड डेटा आर्काइव (आईएनडीए)' और 'इंडियन न्यूक्लियोटाइड डेटा आर्काइव - कंट्रोल्ड एक्सेस (आईएनडीए-सीए)' और पूरे भारत में 50 से अधिक शोध प्रयोगशालाओं से 2,08,055 सबमिशन से 200 बिलियन से अधिक बेस जमा किए जा चुके हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा समर्थित, इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), भुवनेश्वर में डेटा 'आपदा रिकवरी' साइट के साथ क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरसीबी), फरीदाबाद में स्थापित किया गया है। इसमें लगभग 4 पेटाबाइट की डेटा भंडारण क्षमता है। सर्वर केंद्र का नाम ब्रह्म दिया गया है। ब्रह्म मतलब ज्ञान का भंडार। इसमें उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) सुविधा है। कम्प्यूटेशनल-गहन विश्लेषण करने में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं के लिए आईबीडीसी में कम्प्यूटेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराया गया है। उपयोगकर्ता अपने अनुरोध support@ibdc.rcb.res.in पर सबमिट करके डेटा सेंटर से संपर्क कर सकते हैं। 

कम्प्यूटेशनल गहन विश्लेषण करने में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं के लिए आईबीडीसी में कम्प्यूटेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराया गया है। उपयोगकर्ता अपने अनुरोध support@ibdc.rcb.res.in पर सबमिट करके डेटा सेंटर से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, आईबीडीसी डेटा जमा करने में उपयोगकर्ताओं की सहायता के लिए नियमित कार्यशालाएं और अभिविन्यास (https://ibdc.rcb.res.in/news-and-announcement/) आयोजित करता है। आईबीडीसी को डेटा जमा करने के लिए वीडियो ट्यूटोरियल डेटा सेंटर की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। डेटा सबमिशन/विश्लेषण पर किसी भी वर्कशॉप के शेड्यूलिंग के लिए डेटा सेंटर टीम से support@ibdc.rcb.res.in पर भी संपर्क किया जा सकता है।








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