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मंगला एक्सप्रेस में गंदे पानी से बनाया जाता है सूप और अन्य चीज
शिकायत करने पर रेलवे के तमाम अधिकारी गांधी जी के बंदर बने रहे

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज

नई दिल्ली, १ मार्च २०१९

दिल्ली के निजामुद्दीन से चलने वाली मंगला एक्सप्रेस में खाने पीने के नाम पर गंदा पानी और गुणवत्ताहीन खाना परोसा जा रहा है। जबकि रेलवे खान-पीन की सेवाओं को बेहतर बनाने का ढोल पीटती है। मंगला एक्सप्रेस निजामुद्दीन से सुबह 9:15 पर चलती है और केरल के त्रीसूर होते हुए एरनाकुलम तक जाती है। इसमें सूप एवं अन्य चीजों के निर्माण के लिए किए जाने वाले पानी को यदि देख लिया जाए तो किसी का भी होश उड़ जाए। यहां तक परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी निहायत घटिया है।


मंगला एक्सप्रेस में परोसा जाने वाला गंदा पानी।

मजे की बात यह है कि जब एक यात्री ने इसकी शिकायत और तस्वीर निजामुद्दीन के स्टेशन निदेशक, कामिर्शयल इंस्पेक्टर, दिल्ली जोन के सीपीआरओ, नई दिल्ली के स्टेशन निदेशक, डीआरएम, जीएम, जीएम के पीआरओ, उत्तर रेलवे के तमाम पीआरओ, आईआरसीटीसी के पीआरओ, पुरानी दिल्ली के स्टेशन निदेशक आदि को भेजी लेकिन किसी के तरफ से न तो उस यात्री से संपर्क किया गया और न ही किसी तरह की कोई कार्रवाई की गयी। न ही कैटरिंग चलाने वाले से ही पूछताछ हुई।

यानि रेलवे के वे तमाम छोटे-बड़े और मझौले अधिकारी गांधी जी के उस बंदर की तरह नजर आए जो न देखते हैं न सुनते हैं और न बोलते हैं। इससे बड़ी  बिडंबना और क्या हो सकती है। मामला 18 फरवरी 2019 की है। जबकि रेलवे यात्री सुविधा के नाम पर तमाम सारे पैसे तमाम सारी विधाओं से किसी न किसी रूप में यात्रियों से वसूलती है। उसके बाद उसकी ये हालात है। सबसे अफसोसजनक बात तो यह है कि यात्री शिकायत करे तो किससे करे। उदाहरण मंगलाएक्सप्रेस की ही ले लें उस यात्री ने मगंलाएक्सप्रेस में उपयोग किए जाने वाले उस गंदे पानी की तस्वीर तमाम अधिकारियों को वाट्सअप किया लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। यही कारण है भारतीय रेलवे में कैटरिंग चलाने वाला ठेकेदार बड़ी दबंगई से खान-पान परोसता है क्योंकि वह जानता है कि यात्री उसका कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि उस यात्री की कहीं सुनवाई ही नहीं होती। इसके पीछे भी भ्रष्टाचार की एक बड़ी गठजोड़ से नकारा नहीं जा सकता है।


मंगला एक्सप्रेस एक उदाहरण मात्र है तमाम सारी गाड़ियों में यही होता है। इससे पहले भी मंगला एक्सप्रेस में लगभग डेढ़ साल पहले ऐसी ही शिकायत आयी थी जिसमें एक यात्री को बदबूदार सब्जी, कच्ची रोटियां दे दी गईं। इसकी शिकायत करने जब यात्री पेंट्रीकार पहुंचा तो वहां न तो मैनेजर मिला और न ही शिकायत पुस्तिका दी। इस पर यात्री ने ऑनलाइन शिकायत की। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ। जिसकी शिकायत तो की गयी लेकिन सुनने वाला कोई नहीं मिला। यह भारतीय रेलवे और उसमें यात्रा करने वाले यात्रियों की बेहद दुखद पहलू है। आखिर यात्री शिकायत करने जाए तो कहां जाए क्योंकि रेलवे के अधिकारी तो किसी नवाब से कम नहीं व्यवहार करते।



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