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राष्ट्र का गौरव अटल टनल : विश्व की सबसे ऊंची और सबसे लंबी रोड टनल
अटल सुरंग मनाली और लेहमार्ग को सीधे जोड़ती है जो सामरिक रूप से अति महत्वपूर्ण है

मेजर जनरल जे. के. एस.परिहार (सेना निवृत)

नई दिल्ली। 3 अक्टूबर 2020

पूर्व अपर महा निदेशक (सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा)

प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी ने 3 अक्टूबर को मनाली लेह रोड पर रोहतांग पास पर निर्मित अटल टनल का उद्घाटन तथा लोकार्पण किया.इस शुभ एवं एतिहासिक अवसर पर रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह , हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री जय राम ठाकुर,केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर, सी.डी.एस. जनरल बिपिन रावत ,थल सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुन्द नरवणे  तथा सीमा सड़क संगठन के महा निदेशक और इस टनल के निर्माण में सबसे महत्व पूर्ण भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह भी उपस्थित थे.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनाली लेह मार्ग को आज देश को समर्पित किया।

रोहतांग दर्रे के नीचे एक स्ट्रैटजिक टनल का निर्माण करने की ऐतिहासिक परिकल्पना को तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 03 जून, 2000 को अनुमति प्रदान की थी. टनल के दक्षिण पोर्टल की पहुंच रोड की आधारशिला 26 मई, 2002 में रखी गई थी.प्रारम्भिक सर्वेक्षण एवं भूमि अधिग्रहण इत्यादि के पश्चात टनल निर्माण का शिलान्यास जून 2010 में श्रीमती सोनिया गांधी ने किया था. पिछले साल पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वें जयंती पर घोषणा की थी कि हिमाचल प्रदेश में रोहतांग के पास जो टनल बनाई जा रही है उसे अटल टनल के नाम से जाना जाएगा.

अटल टनल दुनिया की सबसे ऊंची और सबसे लंबी रोड टनल है. अटल टनल (सुरंग) को हिमालय की पीर पंजाल रेंज में स्थित  कुल्लू –मनाली लेह मार्ग पर औसत समुद्र तल (एमएसएल) 10,171 फीट की ऊंचाई (औसत समुद्र तल (एमएसएल)) पर रोहतांग पास से जोड़कर अत्याधुनिक मानको के अनुरुप बनाया गया है.अटल सुरंग का दक्षिणी मुहाना( साउथ पोर्टल (एसपी)) मनाली से 25 किलोमीटर  दूर तकरीबन 3060 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि सुरंग का उत्तरी मुहाना (नॉर्थ पोर्टल (एनपी)) 3071 मीटर की ऊंचाई पर लाहौल घाटी में स्थित गांव तेलिंग सिस्सू के पास स्थित है. दोनों पोर्टल पर टनल के दोनों  दक्षिण और उत्तरी पोर्टल पर प्रवेश बैरियर भी लगाए गए हैं.यह टनल एक घोड़े की नाल के आकार की, एकल ट्यूब डबल लेन सुरंग है जिसकी लंबाई करीब 8.8 किलोमीटर तथा चौड़ाई 10.5  मीटर है तथा इसमें 8 मीटर की सड़क है. दोनों ओर 1-1 मीटर के फुटपाथ भी बनाए गए हैं.इसमें 5.525 मीटर की ओवरहेड क्लीयरेंस है.सुरंग में हर 60 मीटर की दूरी पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं. यह टनल सेमी ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, एससीएडीए नियंत्रित अग्निशमन, रोशनी और निगरानी प्रणाली सहित अति-आधुनिक इलेक्‍ट्रो-मैकेनिकल प्रणाली से लैस है.


देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकांक्षा परियोजना रही है।

आपातकालीन कम्युनिकेशन के लिए प्रत्येक 150 मीटर दूरी पर टेलीफोन कनेक्शन  तथा प्रसारण प्रणाली भी प्रदान की गई है. अटल सुरंग को आधुनिक 4 जी इंटरनेट कनेक्टिविटी से युक्त किया गया है जिससे टनल के अंदर 25 एम बी पी एस गति  की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त होगी जबकि सुरंग के माध्यम से तेजी से चलने वाले वाहनों को 10 एमबीपीएस की कनेक्टिविटी प्राप्त होगी.किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए फाइटरक हाइड्रेंट लगाए गए हैं.इतना ही नहीं सुरंग के भीतर हर 500 मीटर की दूरी पर इमर्जेंसी एग्जिट भी बनाए गए हैं. आपात स्थिति में सुरंग से बाहर आने के लिए एक 3.6 x 2.25 मीटर लम्बी अग्नि प्रतिरोधक (फायरप्रूफ)आपातकालीन एग्र्रेस सुरंग है जो मुख्य सुरंग में ही बनाई गई है. ऐसी ऊंचाई पर वेंटिलेशन सिस्टम को शक्ति देने वाले स्विचबोर्ड को -15 डिग्री सेल्सियस और 20 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान जैसी कठिन जलवायु स्थितियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है .


यूपीए के शासन काल में इस सुरंग परियोजना को आगे बढ़ाया गया।

अटल टनल को अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ प्रतिदिन 3000 कारों और 1500 ट्रकों के यातायात घनत्‍व के लिए डिजाइन किया गया है.इस सुरंग के निर्माण से मनाली और लेह के बीच सड़क मार्ग की दूरी 46 किलोमीटर और यात्रा समय करीब 4 से 5 घंटे कम हो जायगा साथ ही इस टनल के द्वारा लेह और मनाली का पूरे साल सभी तरह के मौसम में सड़क यातायात सुगम हो जाएगा जो कि  सामरिक रूप से भी अति महत्वपूर्ण है और इससे पर्यटन में भी गति आएगी क्योंकि इससे पहले ठंड में देश के बाकी हिस्सों से यहां का संपर्क टूट जाता था. इस टनल के निर्माण स्वरूप हिमाचल और लद्दाख के विभिन्न इलाकों जिसमें लाहौल स्पीति घाटी ,चुमार ,पूर्वी लद्दाख के अन्य क्षेत्रों तथा कारगिल से मनाली के सीधे सम्पर्क मार्गों के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है जिसके परिणाम स्वरूप ना केवल सैन्य संचालन में द्रुतगति प्राप्त होगी बल्कि  हिमाचल के उत्तरी क्षेत्रों के बर्फीले दुर्गम इलाकों और लद्दाख के दक्षिणी क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास की संभावनाओं में अत्यंत वृद्धि होगी.

इस प्रोजेक्ट का निर्माण 6 साल से कम समय में होना था लेकिन इसे पूरा होने में 10 साल का समय लगा. अटल टनल प्रोजेक्ट की लागत 2010 में 1,700 रुपये से बढ़कर सितंबर 2020 तक 3,200 करोड़ रुपये हो गई.अटल टनल आधुनिक तकनीक का श्रेष्ठ उदाहरण है.इस टनल को बनाने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इसमें केवल एक छोर से काम कर रहे थे, दूसरा छोर रोहतांग के पास उत्तर में था. एक साल में सिर्फ 5 महीने ही काम किया जा सकता था.इस टनल के निर्माण में  तकरीबन 14 लाख घन मीटर चट्टानों की खुदाई हुई. 2958 करोड़ की लागत.14508 मीट्रिक टन स्टील ,237596 मीट्रिक टन सीमेंट का उपयोग किया गया. इस प्रोजेक्ट को सीमा सड़क संघटन ने बहुत ही कुशलता पूर्वक पूर्ण किया है ,जिसके लिए सीमा सड़क संगठन और अन्य संस्थाएं अत्यंत बधाई के पात्र हैं.हमें इस उपलब्धि पर गर्व है .

रोहतांग टनल के बाद तीन और टनल बनाने की भी तैयारी चल रही है. यह तीनों टनल रोहतांग टनल से भी लंबी होंगी, जिसमें 16000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाले बारालाचा दर्रा में 13.2 किलोमीटर लंबी टनल बनाने की योजना प्रस्तावित है. इसी तरह लाचुंग पास पर 14.5 किलोमीटर लम्बी और तंगलांगला दर्रा पर भी टनल बनाने की योजना विचाराधीन है.


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