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सीमा पर तनातनी फिर चीनी कंपनी को रेलवे में ठेका क्यों...?

एजेंसी समाचार

4 जनवरी 2021

नई दिल्ली

सीमा तनातनी के बीच चीन की एक कंपनी को दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (RRTS) परियोजना में ठेका मिलने पर विवाद हो गया है। वंदेभारत और हाई-वे प्रोजेक्ट जैसी परियोजनाओं से चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया गया था लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना के तहत न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद तक 5.6 किलोमीटर के भूमिगत मार्ग के निर्माण का ठेका एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सहयोगी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने चीनी कंपनी को बोली को कैंसल करने की मांग की है।


विपक्ष के विरोध से पहले ही सरकार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सहयोगी संस्था स्वदेशी जागरण मंच के मुखर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से इस बिड को कैंसल करने की मांग की है। स्वदेशी जागरण मंच पहले भी चीन का धुर विरोधी रहा है। संस्था ने सरकार से चीन की कंपनी को मिले ठेके को रद्द करने और इसके बजाय किसी स्वदेशी कंपनी को आगे बढ़ाने की मांग की है। स्वदेशी जागरण मंच का दावा है कि अगर सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल होना है तो इसके लिए अहम परियोजनाओं में चीनी कंपनियों को बोली लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से चीनी कंपनी की बोली को रद्द करने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक स्वदेशी जागरण मंच की मांग है कि अहम परियोजनाओं में घरेलू कंपनियों को बढ़ावा दिया जाए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के तहत यह ठेका दिया गया है और भारतीय कंपनियों को पूरा मौका दिया गया। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि देश की पहली क्षेत्रीय त्वरित रेल परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) को क्रियान्वित करने वाली एनसीआरटीसी ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के तहत यह ठेका दिया गया है। लेकिन सीमा पर पिछले कई महीनों से जारी तनाव के कारण देश में चीनी सामान और चीनी कंपनियों के बहिष्कार की मांग उठ रही है।

ऐसे में चीनी कंपनी को 1000 करोड़ रुपये का ठेका मिलने से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। एनसीआरटीसी ने नौ नवंबर, 2019 को न्यू अशोक नगर से दिल्ली गाजियाबाद मेरठ आरआरटीएस गलियारे के साहिबाबाद तक सुरंग के निर्माण के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। पांच कंपनियों ने इसके लिए टेक्निकल बोली लगाई थी और टेक्निकल बिड इवेल्यूशन में पांचों ने क्वालीफाई किया था। चीन की कंपनी ने 1126 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाई थी। भारत की टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने कोरिया की कंपनी एसकेईसी के साथ मिलकर बोली लगाई थी। उसकी बोली 1346 करोड़ रुपये की थी। एलएंडटी को बोली 1170 करोड़ रुपये, गुलरमैक की 1326 करोड़ रुपये और एफ्कॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर की बोली 1400 करोड़ रुपये की थी। टेक्निकल बिड पिछले साल 16 मार्च को खोली गई थी।




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