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विज्ञान, तकनीकि और हौसले की मिसाल है दुनिया का यह सबसे ऊंचा रेलवे पुल
भारत और दुनिया भर के विशेषज्ञों की बौद्धिक क्षमताओं की बेमिशाल अभिरचना

आकाश श्रीवास्तव

चिनाब से लौटकर, 6 अप्रैल 2021

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, जम्मू-कश्मीर बारामुला लिंक रेल परियोजना के तहत बनने वाले चिनाब आर्क का निचला आर्क सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक का सफर बेहद रोमांचक होने वाला है। इतना ही नहीं इस महीने के अंत तक ऊपर वाले आर्क का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। हम बता दें कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पर 111 किलोमीटर के सबसे कठिन सेक्शन को उत्तर रेलवे ने दिसंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस पुल के बन जाने से भारत का उत्तरी छोर देश के दक्षिणी छोर से सीधे रेल से जुड़ जाएगा। देश के लिए जो सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होगा।


272 किलोमीटर के इस रेल लिंक पर 28 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 111 किलोमीटर के कटड़ा-बनिहाल सेक्शन पर काम इन दिनों पूरे युद्ध स्तर पर चल रहा है। 2002 में इसे राष्ट्रीय महत्व का परियोजना घोषित किया गया था। उम्मीद है कि सब कुछ ठीकठाक रहा तो शीघ्र ही इस पर रेल लाइन बिछाने का महात्कांशी स्वप्न साकार रूप लेने लगेगा। हम बता दें कि  272 किलोमीटर लंबाई वाले इस रेल लिंक प्रोजेक्ट का 161 किलोमीटर ट्रैक बनकर तैयार है।

इसमें 119 किलोमीटर का रास्ता सुरंग से होकर गुजरता है। यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं होना चाहिए कि आजादी के बाद भारतीय रेलवे के इतिहास में यह पुल विज्ञान और अभियांत्रिकी का बेहतरीन रचना होगी। इस पूरी परियोजना में कुल 38 सुरंग हैं। इसमें सबसे लंबी टनल की लंबाई 12.75 किलोमीटर है. ब्रिज को बनाने के लिए खास तरह के दो केबल कार बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 20 और 37 मीट्रिक टन है। रेल अधिकारियों के मुताबिक 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी अगर हवा चली तो यह पुल आसानी से टिका रहेगा।


भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय परियोजना के इतिहास में ये पुल अब तक का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण होगा। जिसे अगले 120 साल के लिए बनाया जा रहा है। पुल निर्माण साइट की भौगोलिक परिस्थितियां भूकंप और तेज हवा से भी टकराने की क्षमता रखती है. इंजीनियरिंग का अजूबा कहा जा रहा यह पुल तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर पूरी मजबूती से पूरा होने जा रहा है।


इस पुल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे डीआरडीओ के सहयोग से बलास्ट पूर्फ बनाया गया है। साथ ही इस तरह से डिजाइन किया भूकंप का तगड़ा सा तगड़ा झटका भी इस पुल का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उम्मीद है अगले साल के अंत तक भारत के लोग इस पुल पर भारतीय रेलगाड़ी से सफर कर सकेंगे। साथ ही यह पुल पर्यटकों को भी बरबस अपनी तरफ खींचने के लिए मजबूर कर देगा।


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