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कहानी देश की उस डाकखाने की जहां से देश मे डाक पिनकोड की शुरूआत हुई
आडवाणी की पत्नी ने जहां नौकरी की, जहां देश की पहली महिला डाकिया की नियुक्ति हुई

आकाश श्रीवास्तव

नई दिल्ली, 26 जनवरी 2022

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

आज हम भारत के उस पहले डाकखाने के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विशेषताओँ से भरा हुआ है। भारत का यह पहला डाकखाना है जहां से भारतीय डाक पिनकोड की शुरूआत हुई। जी हां यह डाकखाना दिल्ली में स्थिति है जो गोल डाकखाना के नाम से प्रसिद्ध है। गोल डाकखाना इसलिए इसे कहा जाता है कि क्योंकि इसकी जो बनावट है वह पूरी तरह से गाड़ी की पहिए की तरह पूरी तरह से गोल है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा। साथ ही 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरे डाकखाने को नयी नवेली दुल्हन की तरह सजाया गया है। खूबसूरत एलईडी के प्रकाश में गोल डाकखाना अपने ऐतिहासिक सौन्दर्यता के साथ इन दिनों खूबसूरती के चार चांद लगाए हुए है। 

आइए इस डाकखाने के बारे में थोड़ा और विस्तार से जानते हैं। इस डाकखाने का निर्माण आजादी से पहले 1932 में अंग्रेजों द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक गोल डाकखाने में पहले घोड़े बांधे जाते थे। आजादी के बाद वर्ष 1948 में यह नई दिल्ली के प्रधान डाकघर के रूप में अस्तित्व में आया। संसद भवन, राम मनोहर लोहिया अस्पताल व बंगला साहिब गुरुद्वारा के नजदीक स्थित गोल डाकखाना अपनी बनावट के लिए खास है। डाक विभाग का यह गोल डाकखाना कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है। गोल डाकखाना के चंद कदमों की दूरी पर देश का संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, साऊध ब्लाक, नार्थ ब्लाक, देश का प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल राम मनोहर लोहिया स्थिति। यहां से मुश्किल से 10 मिनट की दूरी पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और बगल में क्नाट प्लेस स्थिति है। हम बता दें कि इसे दिल्ली सरकार द्वारा संरक्षित इमारतों में सूचीबद्ध किया गया है। इस डाकघर का पिन नंबर-110001 है जो इसको खास बनाता है। एक बार फिर दोहरा दें कि इसी डाकखाने से सबसे पहले भारतीय डाक पिनकोड की पूरे देश में शुरूआत हुई। 

एक मायने में यह डाकखाना और महत्वपूर्ण है। देश भर से आने वाली राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की जो चिट्ठियां हैं वह इसी डाकखाने से पहुंचायी जाती हैं। देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी ने दिल्ली के इसी गोल डाकखाने में डाक सहायिका के रूप में नौकरी की थी। भारत की पहली महिला डाकिया की नियुक्ति भी इसी डाकखाने से हुई। देश की पहली महिला डाकिया उमा शर्मा ने इसी डाकखाने से चिट्ठी बांटी थी। 

सबसे पुराना होने के कारण यहां खाताधारकों की संख्या कई लाखों में है। इन खाताधारकों में करीब 50 हजार से अधिक बुजुर्ग है। वहीं, रोजाना सैकड़ों कर्मचारी व एजेंटो के साथ ही डाक सामाग्री खरीदने हजारों लोग यहां आते हैं। आस-पास मौजूद स्कूलों के छात्र भी इसमें पोस्टकार्ड खरीदने से लेकर अन्य जरूरी काम के लिए आते हैं। डाकखाने पर अशोक रोड, पंत मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग, राम मनोहर लोहिया अस्पताल की ओर से आ रहा मार्ग और कालीबाड़ी मार्ग आकर मिलते हैं। इस कारण डाकखाने के चारों तरफ गाड़ियों का काफी दबाव होता है। डाक खाने के ग्राहकों के लिए अलग से सड़क मार्ग की मांग बरसों से हो रही है।

डाक विभाग भी आजादी के इस अमृत महोत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा है। यही कारण है कि यहां के जो अधिकारी हैं जिनमें दिल्ली परिक्षेत्र के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल मंजू कुमार, पोस्ट मास्टर जनरल अशोक कुमार, डाक सेवा के निदेशक राम विलास चौधरी, उपनिदेशक बालकृष्ण और गुलशन नागपाल के मार्ग दर्शन में पूरे गोल डाकखाना को नयी नवेली दुल्लहन की तरह प्रकाश से सजाया गया है। रात्रि में जिसकी भव्यता इन दिनों देखते ही बनती है। 26 जनवरी को इस बार राजपथ पर भारतीय डाक विभाग ने अपनी झांकी में प्राचीनतम उपलब्धि से लेकर नवीनतम गतिविधियों कार्यविधियों को दिखाने की पहल की है। 







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