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राहुल ने फिर राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर किया सीधा हमला
अनिल अंबानी को पहुंचाया ३० हजार करोड़ का सीधा फायदा

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

११ अक्टूबर २०१८

एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राफेल पर नए खुलासे से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि प्रधानमंत्री ने 30,000 करोड़ रुपये अनिल अंबानी की जेब में डाले हैं। राहुल ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला करते हुए कहा, 'अनिल अंबानी पर 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, इसलिए पीएम ने उनकी जेब में 30,000 करोड़ रुपये डाल दिए। राफेल के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी ने यह बात कही है।


इससे साफ करप्शन का केस हो ही नहीं सकता है। पूरे हिंदुस्तान को मालूम है कि मोदी जी ने जनता के 30,000 करोड़ रुपये अनिल अंबानी की जेब में डाले हैं।' फ्रांस की इन्वेस्टिगेशन वेबसाइट मीडियापार्ट में छपे एक लेख के हवाले से कहा कि अब दसॉ के सीनियर एग्जिक्युटिव ने भी यह कहा है कि पीएम मोदी के कहने पर रिलायंस को राफेल डील में शामिल किया गया था।  राहुल ने कहा, 'हिंदुस्तान की रक्षा मंत्री फ्रांस जा रही हैं। इससे स्पष्ट संकेत क्या हो सकता है। राहुल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के फ्रांस दौरे पर भी सवाल उठाया। आखिर फ्रांस ऐसा क्या जरूरी काम आ गया है। वह वहां पर दसॉ क फैक्टरी में भी जाएंगी। दैसॉ को एक बात पता है कि उसे एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसलिए उसे वही कहना है, जो भारत की सरकार चाहेगी। लेकिन उसके आंतरिक दस्तावेज में यह बात सामने आई है कि पीएम ने अनिल अंबानी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने की बात कही थी। उन्होंने 30,000 करोड़ रुपये दिलाएं। अभी कई और कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी सच सामने आएगा।'

राहुल ने कहा कि इससे पहले राफेल पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने भी कहा था कि हिंदुस्तान के पीएम ने उनसे कहा था कि अनिल अंबानी को इसका कॉन्ट्रैक्ट मिलना चाहिए। अब राफेल के सीनियर एग्जिक्युटिव रहे एक शख्स ने कहा है कि हिंदुस्तान के पीएम ने अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपये का कॉम्पेंसेशन दिया है। राहुल ने कहा, 'सुना है कि निर्मला सीतारमन जी फ्रांस गई हैं। आखिर क्या इमर्जेंसी है कि वह फ्रांस गई हैं और उन्हें दसॉ की फैक्ट्री में जाना है।' गौरतलब है कि फ्रांस की वेबसाइट ने कथित तौर पर दसॉ के आंतरिक दस्तावेजों और एक एग्जिक्युटिव की टिप्पणी के आधार पर यह कहा है कि इस डील के लिए जरूरी था कि दसॉ अनिल अंबानी की कंपनी को पार्टनर बनाए। यह एक तरह से कॉम्पेन्सेशन की तरह था।





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