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राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम

आकाश श्रीवास्तव
थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली, 3 अगस्त 2022 

भूजल संसाधन, भारतीय कृषि की जीवन रेखा है और 135 करोड़ लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने की कुंजी है। यह हमारे पैरों के नीचे एक छिपा हुआ खजाना है, जिसे देखा नहीं जा सकता है, लेकिन इसका हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। भारत भूजल संसाधनों का सबसे अधिक दोहन करने वाला देश है। बढ़ती आबादी के साथ पानी की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, पिछले कुछ वर्षों में भूजल दोहन में हुई वृद्धि से देश के कई हिस्सों में जल व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कई क्षेत्रों में अति-दोहन हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप जल स्तर नीचे जाने जैसी समस्याएं सामने आयीं हैं।

बढ़ते मानवजनित संदूषण के कारण कई क्षेत्रों में भूजल संसाधनों की पहले से ही गंभीर स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। दूसरी तरफ, भूजल संसाधनों का कम दोहन करने वाले कई क्षेत्र हैं, जहां स्थिति में सुधार करने की संभावनाएं मौजूद हैं। यह भूजल प्रबंधन के सामने एक विशेष तरह की चुनौती पेश करता है, जिसके लिए साक्ष्य-आधारित पहल की आवश्यकता है। तदनुसार, 'सतत भूजल प्रबंधन' पर 12वीं योजना के कार्य-समूह ने भारत के जलभृत या भूजल भण्डार व प्रवाह संरचना के व्यापक मानचित्रण की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जो किसी भी भूजल प्रबंधन कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इसके साथ ही, विभिन्न जल-भूविज्ञान स्थितियों के तहत भूजल के विकास के लिए वैज्ञानिक योजना तैयार की जाती है और बेहतर भूजल प्रबंधन के लिए समुदाय की भागीदारी के साथ प्रभावी प्रबंधन प्रथाओं को विकसित किया जाता है। इसलिए जल संसाधन मंत्रालय (वर्तमान में जल शक्ति मंत्रालय) ने 2012 में राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम (एनएक्यूयूआईएम) की शुरुआत की थी।

एनएक्यूयूआईएम, देश में भूजल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में सहायता के लिए जलभृत प्रबंधन के सन्दर्भ में दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। यह जल प्रबंधन रणनीति विकसित करने के लिए जलभृतों के वैज्ञानिक चित्रण, उनका मानचित्रण करने और एक व्यावहारिक जल प्रबंधन रणनीति विकसित करने के क्रम में मुद्दों का मूल्यांकन करने के लिए बहु-विषयक अध्ययनों पर ध्यान केंद्रित करता है। जलभृत मानचित्रण, उचित पैमाने पर मजबूत भूजल प्रबंधन योजनाओं को सक्षम बनाएगा और इन साझा संसाधनों के लिए योजनाओं के बारे में परामर्श देगा व उन्हें कार्यान्वित भी करेगा।
 
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